Saturday, October 30, 2021

दीपावली की रात करें ये चमत्कारिक उपाय

 दीपावली की रात कर लें यह उपाय÷ 

पैसों की कमी भी कमी नहीं रहेगी,

नमस्कार दर्शकों मैं हूं आपके साथ 
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रमोद कृष्ण शास्त्री (LUCKNOW)

हमारे हिंदू धर्म में दीपोत्सव पर्व का बहुत ही विशेष महत्व है।
इस दीपोत्सव पर्व के दिन सभी सनातन धर्म प्रेमी माता लक्ष्मी गणेश और कुबेर जी का पूजन करते हैं।
लक्ष्मी गणेश पूजन के साथ ही सभी भक्तों सुख समृद्धि की कामना करते हैं।
कार्तिक मास के दिन पढ़ने वाले इस त्यौहार का और भी महत्व बढ़ जाता है क्योंकि कार्तिक मास मैं अमावस्या की काली रात बहुत ही विशेष मानी जाती है धर्म ग्रंथों के अनुसार बताए गए उपायों को दीपावली की रात को करने से चमत्कारिक लाभ प्राप्त होते हैं।


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Pramod Krishna Shastri 
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अमावस्या की काली रात दीपावली के रात में इन चमत्कारिक उपायों को करने बहुत ही लाभ होता है।


दीपावली की रात चमत्कारिक उपायों को कैसे करें???
 जानने के लिए हमारी इस वीडियो को पूरा देखें...
        
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 जानिए चमत्कारी उपाय÷

1- पहला उपाय÷
 दीपावली की काली रात छोटी चांदी की कटोरी में शहद चमेली का इत्र और केसर भरकर उसे लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें जहां पर पैसे रखे जाते हैं इससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी माता लक्ष्मी की कृपा आप पर हमेशा हमेशा बनी रहेगी अगली दिवाली आने पर पुनः इस उपाय को करें दीपावली आने से 1 दिन पहले कटोरी का शहद इत्र और केसर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें और दीपावली की रात इस उपाय को पुनः करें इससे आपके जीवन में हमेशा ही खुशहाली बनी रहेगी।

2- दूसरा उपाय ÷
दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद चांदी की कटोरी में धनिया का बीज साबुत और गुण धनिया और गुरु का माता लक्ष्मी को भोग लगाएं धनिया और गुण माता लक्ष्मी को अर्पित करें इससे माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी माता लक्ष्मी आप पर हमेशा ही प्रसन्न बनी रहेगी धनिया बीज के अंदर एक ऐसी विशेषता होती है जिससे धन लक्ष्मी का आकर्षण बनता है इसलिए धनिया और गुड़ का भोग माता लक्ष्मी को अवश्य लगाएं धनिया धन अर्जन का मार्ग प्रशस्त करती है।




3- तीसरा उपाय÷
यह उपाय कर्ज मुक्ति के लिए विशेषकर माना जाता है जिन जातकों के ऊपर बहुत सारा कर्ज लगा हुआ है वह लोग इस उपाय को अवश्य करें कर्ज मुक्ति उपाय दीपावली की रात इस उपाय को करने से आपको कर्जे से मुक्ति अवश्य ही मिलेगी अपामार्ग के पौधे की जड़ का उपयोग अत्यंत ही चमत्कारी माना जाता है दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन के समय अपामार्ग पौधे की जड़ और पत्ते लाल कपड़े में बांधकर जहां आप पैसे रखते हैं अपनी तिजोरी में रखें इससे कर्ज से मुक्ति मिलेगी और साथ ही आपकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी जिस भी क्षेत्र में आप कार्य कर रहे हैं उसमें सफलता प्राप्त होगी।

4- चौथा उपाय÷
जिन लोगों के जीवन में सुख शांति नहीं है पारिवारिक क्लेश बना रहता है कभी भी जीवन में सुख का अनुभव नहीं होता है दुख ही दुख रहते हैं उन जातकों को इस उपाय को अवश्य करना चाहिए।
इस उपाय को करने से गृह क्लेश से मुक्ति मिलेगी दीपावली के दिन रात्रि में लक्ष्मी पूजन के समय एक पानी वाला नारियल में लाल सूती कलावा को सात बार लपेटे पीने सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं और धूप दीप दिखाने के बाद रात्रि के 12:00 बजने पर उस नारियल को पूजा के स्थान से उठाकर अपने ऊपर से 7 बार उतारे और नारियल को बीच चौराहे पर रख दें हाथ धुल कर सो जाएं ऐसा करने से आपके जीवन में सुख शांति की प्राप्ति होगी घर में चल रहे क्लेश का नाश होगा।

5-पांचवा उपाय÷
पांचवा उपाय बहुत ही चमत्कारी है जिनके जीवन में दांपत्य सुख नहीं है उन्हें यह उपाय अवश्य ही करना चाहिए इस उपाय को करने से दांपत्य जीवन सुख में व्यतीत होता है दीपावली के दिन आपको माता लक्ष्मी को केसर युक्त चावल की खीर बनाकर भोग लगाना पड़ेगा और पांच कुंवारी कन्याओं को इस खीर को वितरित करना पड़ेगा साथ ही कन्याओं को पैसे देकर पैर छुए इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होंगी पति पत्नी में  प्रेम हमेशा ही बना रहेगा ।

6-छठवां उपाय÷
यह उपाय बहुत ही चमत्कारी इस उपाय को एक बार जरूर करें दीपावली के दिन किसी किन्नर को मेहंदी खरीद कर भेंट करें और उस किन्नर से आशीर्वाद स्वरुप ₹1 का सिक्का प्राप्त कर लें उसके को लक्ष्मी पूजन में सम्मिलित करें पूजन के बाद सिक्के को तिजोरी में रखें लाल कपड़े में बांधकर लक्ष्मी पूजन के समय कमल के पुष्पों की माला माता लक्ष्मी को अर्पित करें इससे घर में धन की बढ़ोतरी होगी जीवन सुख में व्यतीत होगा पैसों की जीवन में कभी भी कमी नहीं रहेगी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी ।







Friday, October 29, 2021

सिद्ध नवग्रह स्त्रोत पाठ



 कुंडली दोष निवारण उपाय कुंडली में सभी ग्रहों को शांत रखने के लिए नवग्रह स्त्रोत पाठ करें 

Navgrah stotra

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सनातन धर्म में नौ ग्रहों का विशेष स्थान बतलाया गया है शास्त्रों की माने तो नौ ग्रहों के अनुसार ही हम लोगों का जीवन चलता है हमारी कुंडली में कौन सा ग्रह किस स्थान पर बैठा हुआ है इस पर ही निर्भर करता है कि हमारे जीवन में कितने उतार-चढ़ाव आएंगे इसलिए यह बेहद जरूरी होता है कि आपकी कुंडली में ग्रह आपके अनुकूल ही बने रहें ताकि इन ग्रहों के दुष्प्रभावों से बचा जा सके।

नवग्रह स्त्रोत पाठ संस्कृत में पढ़ना सीखें
 हमारे इस वीडियो के माध्यम से...

नवग्रह स्त्रोत्रम
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महद्युतिं
तमोरिसर्व पापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरं (रवि)
दधिशंख तुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवं
नमामि शशिनं सोंमं शंभोर्मुकुट भूषणं (चंद्र)

धरणीगर्भ संभूतं विद्युत्कांतीं समप्रभं
कुमारं शक्तिहस्तंच मंगलं प्रणमाम्यहं (मंगळ)

प्रियंगुकलिका शामं रूपेणा प्रतिमं बुधं
सौम्यं सौम्य गुणपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहं (बुध)

देवानांच ऋषिणांच गुरुंकांचन सन्निभं
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिं (गुरु)

हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरूं
सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहं (शुक्र)

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजं
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्वरं (शनि)

अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनं
सिंहिका गर्भसंभूतं तं राहूं प्रणमाम्यहं (राहू)

पलाशपुष्प संकाशं तारका ग्रह मस्तकं
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहं (केतु

फलश्रुति :
इति श्रीव्यासमुखोग्दीतम् यः पठेत् सुसमाहितः ।
दिवा वा यदि वा रात्रौ विघ्नशांतिर्भविष्यति ।। १० ।।
नर नारी नृपाणांच भवेत्  दुःस्वप्न नाशन ।
ऐश्वर्यमतुलं तेषां आरोग्यं पुष्टिवर्धनम् ।। ११ ।। 
ग्रह नक्षत्रजाः पीडास्तस्कराग्निसमुभ्दवाः ।
ता: सर्वाःप्रशमं यान्ति व्यासो ब्रुतेन संशयः ।। १२ ।।
।। इति श्रीव्यास विरचितम् आदित्यादी नवग्रह स्तोत्रं संपूर्णं ।।




नौ ग्रहों के नाम कुछ  इस प्रकार हैं÷

सूर्य, चंद्र ,मंगल, बुध बृहस्पति, शुक्र ,शनि राहु और केतु।

 नवग्रहों का संबंध हमारे शरीर के अंगों से होता है

 इन ग्रहों में कोई भी ग्रह यदि दुष्प्रभाव दिखाता है तो हमारे शरीर पर उसका बुरा प्रभाव पड़ता है किसी भी ग्रह की महादशा, अंतर्दशा जातक पर होती है तो उसका प्रभाव अवश्य ही हमारे जीवन पर पड़ता है

शनि की महादशा अंतर्दशा शनि की साढ़ेसाती शनि की ढैया आदि के दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवग्रह स्तोत्र का पाठ अवश्य ही करना चाहिए इससे समर्थ समस्याओं का समाधान होता है नवग्रह प्रसन्न रहते हैं जिसे हमारे जीवन में आने वाली बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।



क्या कहती है आपकी भाग रेखा, bhagya Rekha हाथ में कैसे देखें भाग रेखा

 क्या कहती है आपकी भाग रेखा???,

 हाथ में कैसे देखें भाग रेखा??

 कितनी प्रकार की होती हैं भाग रेखा?? 

भाग रेखा से जुड़ी अनेकों रहस्य fate line जानने के लिए पूरा पढ़ें और हमारे इस वीडियो को देखें

मैं हूं आपके साथ ज्योतिषाचार्य पंडित प्रमोद कृष्ण शास्त्री



bhagya Rekha

चित्र के माध्यम से समझें



हस्तरेखा के अनुसार हाथ में भाग रेखा का होना बहुत ही शुभ माना जाता है भाग रेखा में बताती है हमारे जीवन न्यू होने वाले शुभ योगों के बारे में कि व्यक्ति कैसा जीवन व्यतीत करेगा जीवन में कितनी तरक्की होगी गाड़ी बंगला का सुख प्राप्त होगा या नहीं सरकारी नौकरी मिलेगी कितना पैसा होगा जीवन में इन सभी प्रश्नों का उत्तर भाग रेखा #bhagya_Rekha के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है ,

हाथ में स्वयं कैसे देखे भाग रेखा??

चित्र के माध्यम से समझे हस्तरेखा के अनुसार भाग रेखा मणिबंध यानी कलाई से आरंभ होकर मध्यमा उंगली यानी सबसे बड़ी उंगली के नीचे स्थित शनि पर्वत तक जाती है कभी-कभी यह भाग रेखा हृदय रेखा से भी शुरू होती है कुछ लोगों के हाथ में जीवन रेखा के पास से या चंद्र पर्वत शुक्र पर्वत से भी भागने का आरंभ हो सकती है भागने का कहीं से भी प्रारंभ हो लेकिन यह खत्म शनि पर्वत और सूर्य पर्वत पर ही होती है कभी-कभी तर्जनी उंगली यानी गुरु पर्वत पर भी भाग रेखा खत्म होती है विस्तार से जानने के लिए हमारे इस वीडियो को जरूर देखें



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 हथेली से जुड़ी कुछ बेसिक जानकारी को चित्र के माध्यम से समझे जिससे आपको यह पता चल सके हथेली में कौनसा स्थान किस जगह है जिससे भाग्य रेखा को समझने में आसानी हो सके।

bhagya Rekha


1- शुक्र पर्वत आपके अंगूठे के नीचे वाले भाग में स्थित होता है।

2-तर्जनी यानी सबसे पहली उंगली के नीचे बृहस्पति यानी गुरु पर्वत होता है।

3-मध्यमा यानी सबसे बड़ी उंगली के नीचे के स्थान पर शनि पर्वत का स्थान माना जाता है।

4- सूर्य पर्वत अनामिका यानी सबसे छोटी उंगली के बगल वाली उंगली के नीचे होता है।


5-बुध पर्वत कनिष्ठ का यानी सबसे छोटी उंगली के नीचे होता है।


जानिए भाग्य रेखा के प्रकार एवं फायदे...

भाग्य रेखा मणिबंध यानी कलाई से आरंभ होकर स्पष्ट रूप से सीधी बिना कटे शनि पर्वत यानी सबसे बड़ी उंगली तक जाए तो ऐसा व्यक्ति राजा की तरह जिंदगी व्यतीत करता है 

स्क्रीन पर दिए गए चित्र के माध्यम से समझे

जिनकी भाग्य रेखा कलाई से शुरू होकर शनि पर्वत तक जाती है ऐसे लोगों का जीवन बहुत ही वैभव पूर्ण व्यतीत होता है ।

ऐसे जातकों के जीवन में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती यह जातक जिस क्षेत्र में कार्य करते हैं वहां उन्हें सफलता प्राप्त होती है इनके पास धन वैभव की कमी नहीं रहती है।


यदि भाग्य रेखा शनि पर्वत पर पहुंचकर दो भागों में बांट जाए जिसे दोमुंहा भी कहते हैं और एक मुंह गुरु पर्वत की ओर मुड़ जाए तो ऐसे जातक धर्म परायण एवं दानी होते हैं यह लोग दान देने में कभी भी संकोच नहीं करते ऐसे जातक अपना जीवन लोगों की भलाई के लिए समर्पित कर देते हैं इन्हें समाज में मान सम्मान बहुत अधिक प्राप्त होता है।


यदि हथेली के मध्य में मस्तिष्क रेखा के पास से भाग रेखा का आरंभ होता है तो ऐसे जातक बहुत ही भाग्यशाली होते हैं यह लोग सामान्य परिवार में जन्म लेने के बाद भी अपनी योग्यता और लगन से सफलता के उच्च शिखर को पा लेते हैं अपनी मेहनत के द्वारा सब कुछ प्राप्त कर लेते हैं इनके जीवन में जो भी इन्हें प्राप्त होता है स्वयं की मेहनत से ही इन्हें मिलता है।


यदि भाग्य रेखा कलाई से शुरू होकर सीधी शनि पर्वत को पार कर जाए उंगली के पूरे तक पहुंच जाए ऐसी भाग रेखा शुभ नहीं मानी जाती है ऐसे जातकों को अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ता है जीवन संघर्ष से भरा रहता है मेहनत करने के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं हो पाती है



यदि भाग रेखा मणिबंध से यानी कलाई से आरंभ होकर शनि पर्वत की ओर जाते हुए हृदय रेखा पर ही रुक जाए तो ऐसे जातकों को प्रेम संबंध के कारण जीवन में असफलताएं प्राप्त होती हैं यही रेखा यह गुरु पर्वत तक पहुंच जाए तो प्रेम संबंध के कारण अनेकों सफलताएं प्राप्त होती है धन की प्राप्ति हमेशा होती रहती है।


यदि भाग्य रेखा शुक्र पर्वत से निकलकर शनि पर्वत तक पहुंच जाए और साथ ही जितनी ज्यादा गहरी और स्पष्ट होती है उतना ही शुभ मानी जाती है यह रेखा जीवन रेखा को काटकर निकलती है इसलिए उस उम्र में जातक को अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन ऐसे जातकों को पत्नी बहुत ही सुंदर और सुशील प्राप्त होती है।


भाग रेखा जितनी गहरी मोटी और स्पष्ट होती है उसे उतना ही शुभ माना जाता है ऐसे लोग बहुत ही भाग्यशाली होते हैं इन लोगों को पैतृक संपत्ति का अधिक लाभ होता है इनके पास किसी भी वस्तु की कमी नहीं रहती है।



दर्शकों एक बात जीवन में हमेशा ध्यान रखना जिनके हाथों में भाग रेखा या रेखाएं सही नहीं है उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है जिनके हाथ में भाग रेखा नहीं होती है वह भी ऊंचे शिखर पर पहुंचते हुए देखे गए हैं जीवन में कर्म ही प्रधान होता है कर्म के द्वारा अपने भाग को भी बदल सकते हैं














हाथ की तीन रेखाएं होती हैं बेहद खास इनमें छुपे हुए जीवन से जुड़े अनेकों रहस्य

 हाथ में यह तीन रेखाएं होती हैं बेहद खास (palmistry lines) इनमें छुपे होते हैं जीवन से जुड़े अनेकों रहस्य...


palmistry lines

चित्र के अनुसार समझे
नमस्कार दोस्तों मैं हूं आपके साथ पंडित प्रमोद कृष्ण शास्त्री आज हम बात करेंगे हाथ की मुख्य तीन रेखाओं के बारे में.. 
1जीवन रेखा
2 हृदय रेखा
3 मस्तिष्क रेखा

हस्त रेखा को भारतीय ज्योतिष का अभिन्न अंग माना गया है हाथ की रेखाओं की सहायता से व्यक्ति के जीवन मैं घटने वाली घटनाओं का पहले से ही अनुमान लगाया जा सकता है।

आइए जानते हैं जीवन रेखा ( life  line) कितने प्रकार की होती है??


हस्त रेखाओं के बारे में जानने की हमारे इस वीडियो को जरूर देखें...
 
Astrologer pramod Krishna Shastri 
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1 कटी हुई जीवन रेखा
 2 छोटी जीवन रेखा
 3 जंजीर की तरह जीवन रेखा
 4 जीवन रेखा में क्रॉस का निशान
5 जीवन रेखा का पूर्ण रूप से ना बनना
6 लंबी एवं गहरी जीवन रेखा
7 मोटी जीवन रेखा


लंबी एवं गहरी जीवन रेखा...

जिन लोगों के हथेली में जीवन रेखा लंबी एवं गहरी होती है वह लोग जीवन भर निरोगी रहते हैं साथ ही लंबी आयु समझी जाती है।


जीवन रेखा में क्रॉस (×) का निशान...


अगर किसी के हाथ में जीवन रेखा के अंत में क्रॉस का निशान होता है तो इसका संकेत होता है कि व्यक्ति को जीवन के अंतिम समय में अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


क्या आपके हाथ में छोटी जीवन रेखा है ???

जिन लोगों के हाथों में छोटी जीवन रेखा होती ऐसे लोग बहुत ही कोमल स्वभाव के होते हैं इसी स्वभाव के कारण लोग उन पर हावी होने का प्रयास करते हैं साथ ही ऐसे जातकों का जीवन बीमारियों से घिरा रहता है साथी छोटी-मोटी दुर्घटनाएं घटती रहती हैं छोटी जीवन रेखा संकेत करती है कम उम्र के बारे में



कटी हुई जीवन रेखा

जिन जातक के हाथ में जीवन रेखा को अनेकों छोटी-छोटी रेखाएं काट रही है तो व्यक्ति के जीवन में कोई बड़ी बीमारी या सड़क दुर्घटना आदि का सामना करना पड़ सकता है।


यदि जीवन रेखा साफ-सुथरी और स्पष्ट रूप से अर्ध गोलाकार के आकार की है तो ऐसी रेखा बहुत ही शुभ मानी जाती है ऐसे लोग बहुत ही उत्साह ही ऊर्जावान और लंबी उम्र के होते हैं इनका जीवन हमेशा ही निरोगी रहता है।


हाथ की हथेली में जंजीर की तरह जीवन रेखा

ऐसा व्यक्ति जिसके हाथ में जंजीर की तरह जीवन रेखा होती है वह हमेशा ही बीमारियों से घिरा रहता है।
 जंजीर की तरह जीवन रेखा जगह-जगह कटीली होती है जिसके कारण अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ता है शारीरिक कष्ट जीवन भर प्राप्त होता है



जानिए हृदय रेखा के बारे में...


फिर तो रेखा का आरंभ तर्जनी उंगली के पास से होता है
तर्जनी उंगली से होते हुए कनिष्ठा उंगली की ओर ह्रदय रेखा जाती है।

कभी-कभी हृदय रेखा पहली और दूसरी उंगली के बीच से शुरू होती है किसी के हाथ में शनि पर्वत यानी सबसे बड़ी उंगली में से रेखा आरंभ होती है जो कि कनिष्ठ का यानी सबसे छोटी उंगली तक जाती है।


जिनके हाथ में हृदय रेखा ना के बराबर होती है हृदय रेखा का ना होना संकेत देता है कि ऐसे लोग बहुत ही स्वार्थी होते हैं चतुर तर्क करने में माहिर और कामुक होते हैं।
ऐसे लोग दिल से नहीं दिमाग से काम लेते हैं ऐसे लोग हमेशा ही संवेदनाओं से दूर रहते हैं।
 इनके जीवन में प्रेम कोई मतलब नहीं होता है।

जिनके हाथ में हृदय रेखा आधी अधूरी है मृत्यु हुई नजर आती है ऐसे लोगों के जीवन में प्रेम की कमी हमेशा रहती है इनको प्यार में हमेशा धोखा ही मिलता है जीवन में आनंद का अभाव रहता है।

यदि हृदय रेखा लंबी दोषमुक्त होती है तो ऐसे जातकों के जीवन में प्रेम की कमी नहीं रहती उन्हें प्रेम में बहुत ही अच्छे परिणाम हासिल होते हैं यदि हृदय रेखा मस्तिष्क रेखा से जुड़ जाए या अन्य कोई रेखा हृदय रेखा को काट दे तो ऐसे लोग हमेशा ही तनाव भरा जीवन व्यतीत करते हैं।



अब जानेंगे मस्तिष्क रेखा के बारे में...


जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा का आपस में बहुत ही गहरा संबंध होता है।
ज्यादातर जीवन रेखा के अंदर से मिलते हुए मस्तिष्क रेखा का आरंभ होता है

यदि मस्तिष्क रेखा जहां समाप्त होती है वहां क्रॉस का निशान हो तो ऐसे जातक वृद्धावस्था में मंदबुद्धि के हो जाते हैं ऐसा ज्योतिष शास्त्र कहता है।










Friday, September 24, 2021

जन्म कुंडली में जाने नौकरी है या व्यापार

जन्म कुंडली में क्या है नौकरी या फिर व्यापार ???

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में 12 भाग होते हैं कुंडली के दशम भाव से ही पता चलता है कि व्यक्ति क्या करेगा सरकारी नौकरी मिलेगी या प्राइवेट नौकरी करना पड़ेगा

जन्म कुंडली के 11 वे स्थान से पता चलता है कि व्यक्ति क्या काम आएग नौकरी मिलने के बाद या फिर व्यापार में कितना काम आएगा जीवन में धनवान बनने का योग है या नहीं

जन्म कुंडली के द्वितीय भाव से पता चलता है जातक पैसा कितना बचाएगा यह बात बहुत ही अहम होती है हम कमाते तो बहुत हैं पूरा जीवन काम आते हैं लेकिन पैसा बचता नहीं है मैंने बहुत लोगों के मुख से यह सुना है कि मैं बहुत कम आता हूं लेकिन पैसा बचा नहीं पाता कुंडली के द्वितीय भाव से यह पता चलता है कि आप पैसा बचा पाएंगे या नहीं।



जन्म कुंडली में दशम भाव के स्वामी को दशमेश या कर्मेश भी कहते हैं इस भाव से यह देखा जाता है कि व्यक्ति किस क्षेत्र में कार्य करेगा सरकारी नौकरी मिलेगी या प्राइवेट नौकरी करना पड़ेगा अगर सरकारी नौकरी नहीं मिली प्राइवेट नौकरी का भी कोई योग नहीं है तो फिर व्यापार कौन सा करेगा किस व्यापार में सफलता मिलेगी किस क्षेत्र में कार्य करेगा यह दशम भाव से जाना जा सकता है।

दशम भाव नवग्रह फल



 दशम भाव में वृश्चिक राशि का सूर्य  हमेशा चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा अधिकारी बनाता है या फिर सीनियर डॉक्टर आदि बनता है जातक मेष कर्क सिंह या धनु राशि का सूर्य सेना में ऊंचा पद प्रदान कराता है पुलिस अधिकारी भी बना सकता है 



मेष राशि सिंह राशि वृश्चिक राशि या धनु राशि का मंगल जातकों को प्राइवेट चिकित्सक सर्जन बनाता है प्राइवेट डॉक्टर बनने के योग होते हैं मंगल धन प्राप्ति का योग बनाता है यदि मंगल का सूर्य से संबंध होता तो व्यक्ति सोने चांदी का भी काम कर सकता है इस क्षेत्र में अधिक लाभ होता ह


  1. शनि का संबंध यदि चतुर्थ भाव या चतुर्थेश से हो तो जातक लोहे कोयले मिट्टी के तेल जैसा व्यापार कर सकता है इसमें उसे विशेष लाभ प्राप्त होता है अधिक सफलता मिलती है
  2. यदि दशम भाव में एक से अधिक ग्रह हो और उनमें से जो ग्रह सबसे अधिक बलवान होगा जातक उससे जुड़ा व्यापार करें तो अधिक लाभ होगा जैसे दशम भाव में मंगल हो तो प्रॉपर्टी निवेश अथवा पुलिसिया सोने में भी निवेश कर सकता है।
  • यदि दशम भाव में कोई ग्रह न हो तो दशम भाव के स्वामी के अनुसार व्यापार तय होता है
  • अधिक जानकारी के लिए हमारे वीडियो को जरूर देखें

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जन्म कुंडली के अनुसार नौकरी करें या व्यापार किस कार्यक्षेत्र में मिलेगी अधिक सफलता
लोगों के मनमें ये प्रश्न जरूर आता है।
उन्हें नौकरी करना चाहिए या व्यापार
नौकरी में भी प्राइवेट नौकरी करनी पड़ेगी या मिलेगी सरकारी नौकरी व्यापार करें भी तो कौन सा जो अधिक फलीभूत हो सके।
जन्म कुंडली में 12 भाव होते हैं उन्हीं के आधार पर जातक की कुंडली में नौकरी या व्यापार के बारे में जाना जाता है


Thursday, September 23, 2021

पंचक में क्या करें क्या ना करें

 पंचक में क्या करें क्या न करें??  कितने प्रकार के होते हैं पंचक


क्या। पंचक में मृत्यु होने पर 5 लोगों की होती है मृत्यु की आशंका ?????


क्या होता है पंचक

हिंदू धर्म में किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों को करने से पहले शुभ मुहूर्त जरूर देखा जाता है ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य में सफलता प्राप्त होती है वही अशुभ मुहूर्त में किया गया कार्य सफल नहीं होता अनेकों बाधाएं उत्पन्न होती है कोई भी शुभ कार्य करने से पहले पंचक के बारे में अवश्य जान लेना चाहिए।

5 नक्षत्रों के बीच का समय पंचक काल कहलाता है धनिष्ठा, नक्षत्र सतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र के चारों चरण में भ्रमण काल पंचक होता है इस पंचक काल को बहुत ही अमंगल सूचक माना जाता है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार देखें तो पंचक को बहुत ही अशुभ माना जाता है इस समय कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए ।  


जानिए कितने प्रकार के होते हैं पंचक???

1-रोग पंचक

 2-राज पंचक

3- अग्नि पंचक

4- मृत्यु पंचक

5- चोर पंचक


पंचक में मृत्यु होने पर क्या होता है 5 लोगों की मृत्यु की आशंका बनी रहती है इससे कैसे बचें

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माने तो ऐसी मान्यता है कि पंचक काल का समय बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता के अनुसार पंचक काल को बहुत ही अशुभ माना जाता है पुराणों के अनुसार जब भगवान श्री राम द्वारा रावण का वध हुआ रावण की मृत्यु के बाद से ही 5 दिन का पंचक माना जाता है।

ज्योतिष के अनुसार अगर पंचक काल में किसी की मृत्यु हो जाए तो उसे अशुभ मानते हैं क्योंकि उसके साथ ही परिवार में 5 लोगों की मृत्यु की आशंका बनी रहती है इससे बचने के लिए मृतक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के समय पांच जो के आटे के पुतले या फिर कुछ से बने पुतली बनाकर उसका भी मृतक के साथ दाह संस्कार करने का विधान है ऐसा करने से पंचर दोष समाप्त हो जाता है परिवार में 5 लोगों की मृत्यु की आशंका भी समाप्त हो जाती है।

संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे इस वीडियो को जरूर देखें...


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Wednesday, September 22, 2021

श्री महामृत्युंजय मंत्र जप के चमत्कारिक फायदे

 श्रीमहामृत्युंजय मंत्र जप अनुष्ठान से जन्मकुंडली के अनेकों दोष समाप्त हो जाते हैं।


रोग से मुक्ति
जो लोग हमेशा बीमारी से परेशान रहते हैं बीमारी उनका पीछा नहीं छोड़ती घर में कोई न कोई बीमार ही बना रहता है उन्हें महामृत्युंजय मंत्र जप अनुष्ठान अवश्य कराना चाहिए इससे उन्हें विशेष लाभ प्राप्त होगा। 

दीर्घायु प्राप्ति
जिन जातकों की कुंडली में अल्प आयु दोष है या फिर मार्केट बन गया है उन्हें मृत्यु का भय सता रहा है ऐसे जातकों को
श्री महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जप करवाना चाहिए इससे उनके कुंडली का मार्केस समाप्त हो जाएगा लंबी उम्र प्राप्त होगी।

संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी इस वीडियो को जरूर देखें÷

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धन प्राप्ति के लिए

श्री महामृत्युंजय मंत्र जप से जातक पैसों की तंगी से छुटकारा पा सकता है इस मंत्र जप से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है सुख समृद्धि से घर परिवार परिपूर्ण हो जाता है व्यापार में बढ़ोतरी होती है मान सम्मान बढ़ता है।

 श्री महामृत्युंजय मंत्र जप से सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। विशेष रूप से कहे तो संसार में ऐसा कोई कार्य नहीं जो महामृत्युंजय मंत्र के प्रभाव से पूर्ण ना हो सके।

  •  बड़े से बड़े कार्य को भी इस मंत्र जप के द्वारा किया जा सकता है महामृत्युंजय मंत्र जप से देवाधिदेव महादेव भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं और सभी मनोकामना पूर्ण कर देते हैं।





माणिक्य रत्न के चमत्कारी फायदे

  12 राशियों में माणिक रत्न धारण करने से किसे होगा लाभ और किसे होगी हानि??? राशि के अनुसार किसे माणिक रत्न धारण करना चाहिए?? Pramod Krishna ...