कुंडली दोष निवारण उपाय कुंडली में सभी ग्रहों को शांत रखने के लिए नवग्रह स्त्रोत पाठ करें
Astrologer- Pramod Krishna Shastri,LUCKNOW
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सनातन धर्म में नौ ग्रहों का विशेष स्थान बतलाया गया है शास्त्रों की माने तो नौ ग्रहों के अनुसार ही हम लोगों का जीवन चलता है हमारी कुंडली में कौन सा ग्रह किस स्थान पर बैठा हुआ है इस पर ही निर्भर करता है कि हमारे जीवन में कितने उतार-चढ़ाव आएंगे इसलिए यह बेहद जरूरी होता है कि आपकी कुंडली में ग्रह आपके अनुकूल ही बने रहें ताकि इन ग्रहों के दुष्प्रभावों से बचा जा सके।
नवग्रह स्त्रोत पाठ संस्कृत में पढ़ना सीखें
हमारे इस वीडियो के माध्यम से...
नवग्रह स्त्रोत्रम
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महद्युतिं
तमोरिसर्व पापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरं (रवि)
दधिशंख तुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवं
नमामि शशिनं सोंमं शंभोर्मुकुट भूषणं (चंद्र)
धरणीगर्भ संभूतं विद्युत्कांतीं समप्रभं
कुमारं शक्तिहस्तंच मंगलं प्रणमाम्यहं (मंगळ)
प्रियंगुकलिका शामं रूपेणा प्रतिमं बुधं
सौम्यं सौम्य गुणपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहं (बुध)
देवानांच ऋषिणांच गुरुंकांचन सन्निभं
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिं (गुरु)
हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरूं
सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहं (शुक्र)
नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजं
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्वरं (शनि)
अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनं
सिंहिका गर्भसंभूतं तं राहूं प्रणमाम्यहं (राहू)
पलाशपुष्प संकाशं तारका ग्रह मस्तकं
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहं (केतु
फलश्रुति :
इति श्रीव्यासमुखोग्दीतम् यः पठेत् सुसमाहितः ।
दिवा वा यदि वा रात्रौ विघ्नशांतिर्भविष्यति ।। १० ।।
नर नारी नृपाणांच भवेत् दुःस्वप्न नाशन ।
ऐश्वर्यमतुलं तेषां आरोग्यं पुष्टिवर्धनम् ।। ११ ।।
ग्रह नक्षत्रजाः पीडास्तस्कराग्निसमुभ्दवाः ।
ता: सर्वाःप्रशमं यान्ति व्यासो ब्रुतेन संशयः ।। १२ ।।
।। इति श्रीव्यास विरचितम् आदित्यादी नवग्रह स्तोत्रं संपूर्णं ।।
नौ ग्रहों के नाम कुछ इस प्रकार हैं÷
सूर्य, चंद्र ,मंगल, बुध बृहस्पति, शुक्र ,शनि राहु और केतु।
नवग्रहों का संबंध हमारे शरीर के अंगों से होता है
इन ग्रहों में कोई भी ग्रह यदि दुष्प्रभाव दिखाता है तो हमारे शरीर पर उसका बुरा प्रभाव पड़ता है किसी भी ग्रह की महादशा, अंतर्दशा जातक पर होती है तो उसका प्रभाव अवश्य ही हमारे जीवन पर पड़ता है
शनि की महादशा अंतर्दशा शनि की साढ़ेसाती शनि की ढैया आदि के दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवग्रह स्तोत्र का पाठ अवश्य ही करना चाहिए इससे समर्थ समस्याओं का समाधान होता है नवग्रह प्रसन्न रहते हैं जिसे हमारे जीवन में आने वाली बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।