नीलम रत्न को कब और कैसे धारण करना चाहिए???
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नीलम रत्न धारण करने की संपूर्ण विधि जानिए ज्योतिषाचार्य पंडित प्रमोद कृष्ण शास्त्री के साथ हमारे इस ब्लॉग पर आपका बहुत-बहुत स्वागत है आपके मन में कोई सवाल है ज्योतिष संबंधी कोई समस्या है तो कमेंट बॉक्स में लिखें।
नीलम रत्न शनि ग्रह का रत्न माना जाता है यह रतन बहुत ही प्रभावशाली होता है यह एक ऐसा रत्न है जो अपना प्रभाव जातक पर बहुत जल्द दिखाता है यदि नीलम रत्न व्यक्ति को फायदा कर गया तो मालामाल कर देता है
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और यदि फायदा ना किया तो देखते ही देखते ही व्यक्ति को कंगाल बना देता है इसलिए नीलम रत्न को धारण करने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श जरूर करें।
नीलम बहुत ही महंगा रत्न होता है इसलिए नीलम रत्न बेचने वाले लोग नकली पत्थर को असली नीलम बताकर बेच देते हैं भोले वले लोगों को चूना लगा देते हैं इस समस्या से बचने के लिए हमारी पोस्ट को पूरा पढ़ें।
नीलम रत्न की पहचान कैसे करें। असली है या नकली?????_________________________________
नीलम की पहचान करने के लिए कांच के गिलास में कच्चा गाय का दूध भरे अब उसमें नीलम पत्थर को डालें कुछ समय बाद यदि दूध हल्का नीला नीला दिखने लगे दूध यदि थोड़ा सा भी रंग बदले तो नीलम असली समझे असली नीलम ही चमत्कारी प्रभाव दिखा सकता है हर नीला पत्थर नीलम नहीं हो सकता यह ध्यान रखें।
असली नीलम बहुत ही चिकना और चमकदार होता है यह रत्न मोर के पंख के समान हल्का नीला होता है असली नीलम की पहचान करने के लिए पानी से भरे कांच के गिलास को धूप में सफेद कपड़े पर रखें और ग्लास में नीलम पत्थर डालें यह गिलास में नीली नीली करने नजर आए तो नीलम रत्न को असली समझे।
किसे धारण करना चाहिए नीलम रत्न?????
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मेष राशि वृष राशि तुला राशि एवं वृश्चिक राशि के लोगों को नीलम रत्न लाभ देता है यदि जन्म कुंडली में शनि चतुर्थ भाव पंचम भाव दशम भाव या फिर एकादश भाव में विराजमान हो तो जातक नीलम धारण कर सकते हैं नीलम रत्न धारण करने से व्यक्ति की धन संपत्ति से जुड़ी समस्याएं समाप्त होती हैं साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत होती है नौकरी व्यापार में भी लाभ होता है।
नीलम रत्न धारण करने की संपूर्ण विधि
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नीलम रतन को पंच धातु से बनी अंगूठी में जड़वा कर पहनना चाहिए नीलम रत्न को हमेशा ही बाएं हाथ की मध्यमा उंगली में धारण करना चाहिए नीलम रत्न कम से कम 7:15 रत्ती का होना चाहिए नीलम रत्न कृष्ण पक्ष में शनिवार के मध्य रात्रि में धारण करने से अधिक लाभ होता है नीलम रत्न धारण करने के बाद मांस मदिरा का सेवन ना करें इससे अधिक लाभ होगा।