Monday, September 12, 2022

पितृदोष निवारण उपाय

 क्या होता है पितृदोष ???

पितृदोष के कारण एवं लक्षण ??? #Pitra_dosh #pitru_Paksh 

ज्योतिषाचार्य प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज से जानिए पितृदोष निवारक अचूक उपाय, पितृदोष के कारण एवं लक्षण #pitra_dosh_nivaran_upay 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखे तो जन्म कुंडली में कुछ योग ऐसे होते हैं। जो बहुत ही शुभ माने जाते हैं जिनसे अनेकों लाभ होते हैं। वहीं कुछ योग ऐसे भी होते हैं जो बहुत ही अशुभ होते हैं जिसके कारण जीवन परेशानियों से भरा रहता है। जी हां हम बात कर रहे हैं पित्र दोष के बारे में जन्म कुंडली में पितृ दोष का होना बहुत ही अशुभ माना जाता है।



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पितृदोष के क्या लक्षण होते हैं कैसे जाने पितृदोष है या नहीं ?? #kundli_dosh 
  • यदि जन्म कुंडली में पित्र दोष है तो संतान प्राप्ति में अनेकों बाधाएं आती हैं कभी-कभी तो संतान सुख से वंचित रहना पड़ता है और यदि संतान हो भी गई तो मंदबुद्धि या विकलांग पैदा होती है।
  • यदि आप नौकरी या व्यापार करते हैं तो उसमें मेहनत करने के बाद भी हानि ही होती है अनेकों प्रयास के बाद भी असफलता ही हाथ आती है।
  • पित्र दोष के कारण घर में हमेशा लड़ाई झगड़े होते रहते हैं घर में कभी भी शांति नहीं रहती है एक दूसरे के लिए एकता का भाव बना रहता है।
  • जिस घर में पितृदोष लगा होता है उस घर में कोई ना कोई लगातार बीमार रहता है इलाज के बाद भी बीमारी समाप्त नहीं होती है ।
  • पितृदोष के कारण घर में भोजन को इस समय भोजन को लेकर हमेशा ही झगड़ा होता है।
  • पितृदोष के कारण घर में कोई शुभ कार्य नहीं होता और यदि शुभ कार्य हुआ भी तो उसमें लड़ाई झगड़े होते।
  • विवाह के योग होने पर भी दीवाना होना।
  • पितृदोष के कारण घर के कमाने वाले व्यक्ति को चोट लगना एक्सीडेंट हो जाना बीमार पड़ जाना ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • पितृदोष के कारण घर परिवार में कम उम्र के लोगों का बीमारी से या या किसी दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाना
  • घर परिवार के सदस्यों पर प्रेत बाधा का प्रभाव होना घर में मांगलिक कार्यों का ना होना ग्रह के लिए शादी ऐसे लक्षण होन पर समझे कि घर में पितृदोष है।

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जानिए पितृदोष किन कारणों से होता है ??? 

घर परिवार में मृत्यु के बाद विधिवत अंतिम संस्कार न करना आज के समय में लोगों के पास समय ना होने के कारण तेरहवीं को 3 या 5 दिन में संपन्न कर देना ही पितृदोष का सबसे बड़ा कारण बनता है।

पितृपक्ष में विद्वत सराधना करना जिससे पुत्र नाराज हो जाते हैं और पित्र दोष उत्पन्न हो जाता है धर्म के विरुद्ध आचरण करने से भी पित्र नाराज हो जाते हैं ।

पीपल बरगद के पेड़ को काटने या कटवाने से भी पितृदोष उत्पन्न हो जाता है।


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पितृदोष निवारण उपाय÷  इन उपायों को करने से धीरे-धीरे पित्र दोष समाप्त हो जाता है।

  1. आश्विन मास के श्राद्ध पक्ष में जिसे पितृपक्ष के नाम से भी जाना जाता है।
  2. पितृपक्ष में नित्य पितरों के लिए तर्पण करें काले तिल पुष्प जल में डालकर पितरों को अर्पित करें।
  3. पितृदोष निवारण हेतु पीपल के वृक्ष पर कच्चा गाय का दूध चढ़ाएं ॥ ॐ पित्र देवताभ्यो नमः ॥  मंत्र का जप करते हुए पीपल की 11 या 21 बार परिक्रमा करें इससे पित्र दोष से मुक्ति मिलेगी।
  4. पितृदोष निवारण हेतु पितृपक्ष में प्रतिपदा तिथि के दिन गरी के गोले में देसी घी आटे और चीनी से बनी पंजीरी भर के पीपल के पेड़ के नीचे मिट्टी खोदकर दबा दें इससे पित्र दोष में लाभ होता है।
  5. प्रत्येक अमावस्या के दिन घर में पितृ गायत्री मंत्र के द्वारा हवन करें 1 वर्ष लगातार हवन के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा आदि प्रदान करें।
  6. प्रत्येक अमावस्या के दिन श्रीमद्भागवत महापुराण के गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें या ब्राह्मण के द्वारा कराएं।
  7. प्रत्येक अमावस्या के दिन प्रातः कालीन संध्या काल में कच्चा गाय का दूध पीपल के वृक्ष पर चढ़ाएं दूध और चावल से बनी खीर बनाकर ब्राह्मण को खिलाएं दक्षिणा प्रदान करें।
  8. सवा किलो चावल साबुत खरीद कर घर ले आए मिथुन चावल में से एक मुट्ठी चावल अपने ऊपर उतार कर पीपल वृक्ष के नीचे डाल दें यह उपाय लगातार 41 दिनों तक करें इससे पितृ दोष शांत होगा।
  9. जन्म कुंडली में पित्र दष होने पर जातक को अपने स्वर्गीय परिजनों का फोटो घर के दक्षिण दिशा की ओर दीवार पर लगाकर मिथुन का स्मरण करें चंदन की माला पहनाए।
  10. काले उड़द के आटे से बनी रोटी में सरसों का तेल लगाकर प्रत्येक शनिवार के दिन काले रंग के कुत्ते को खिलाएं इससे शनि राहु केतु ग्रहों की कृपा प्राप्त होगी पित्र दोष शांत होगा।
  11. पितृ दोष निवारण हेतु किसी विद्वान ब्राह्मण के द्वारा सप्त दिवसीय पित्र दोष निवारक अनुष्ठान संपन्न कराएं इस अनुष्ठान से पूर्ण रुप से पित्र दोष से मुक्ति मिलेगी
  12. घर परिवार एकजुट होकर सप्त दिवसीय श्रीमद् गवत महापुराण कथा श्रवण करें भंडारा करें इक्कीस ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इन उपायों में से कोई भी उपाय श्रद्धा और विश्वास के साथ करें जिससे आपको लाभ होगा।


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